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चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ रोग का कारण संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ के काटने से फैलने वाला वायरस है। चिकनगà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ वायरस (CHIKV) के लिठपà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤° à¤à¤œà¥‡à¤‚ट मचà¥à¤›à¤°, à¤à¤¡à¥€à¤œ à¤à¤œà¤¿à¤ªà¥à¤Ÿà¥€ या पीला बà¥à¤–ार मचà¥à¤›à¤° है। CHIKV अलà¥à¤«à¤¾à¤µà¤¾à¤¯à¤°à¤¸ और मचà¥à¤›à¤° जनित अरà¥à¤¬à¥‹à¤µà¤¾à¤¯à¤°à¤¸ है।
यह वायरस मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से उषà¥à¤£ कटिबंध में पाया जाता है। à¤à¤• अनà¥à¤¯ मचà¥à¤›à¤° पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿ जिसे वाहक पाया गया है वह है à¤à¤¡à¥€à¤œ à¤à¤²à¥à¤¬à¥‹à¤ªà¤¿à¤•à¥à¤Ÿà¤¸à¥¤ à¤à¤¡à¥€à¤œ à¤à¤œà¤¿à¤ªà¥à¤Ÿà¥€ दिन के समय काटता है। वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ से à¤à¤¡à¥€à¤œ मचà¥à¤›à¤° विकसित हà¥à¤† है और मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ को काटने के लिठखà¥à¤¦ को अनà¥à¤•ूलित किया है। यहां तक ​​कि इंसानों के पास जाते समय वे पंखों की गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¾à¤¹à¤Ÿ को à¤à¥€ कम कर देते हैं और नीचे से हमला करते हैं, इसलिठकम से कम पहचान होती है। यह मचà¥à¤›à¤° आमतौर पर शहरी इलाकों में देखा जाता है। à¤à¤¡à¥€à¤œ मचà¥à¤›à¤° को पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ के लिठकेवल 2 मिली पानी की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है, और उनके अंडे à¤à¤• वरà¥à¤· तक निषà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯ रह सकते हैं। वाहक मचà¥à¤›à¤° à¤à¥€ संकà¥à¤°à¤®à¤£ को अपनी अगली पीढ़ी तक पहà¥à¤‚चा सकते हैं।
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